हीर रांझा – 20 – मां बाप भाई और काजी से हीर का झगड़ा

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रांझे से मिलने के बाद जब हीर जंगल से लौटी तो देखा कि उसके मां-बाप काजी को बुला चुके थे। चूचक और मिल्की ने हीर को काजी के सामने बैठने को कहा। काजी ने हीर को समझाना शुरू किया।

‘बेटी, हम सब तुम्हारी भलाई चाहते हैं। हमारी बातों पर गौर करो। तुम चूचक की बेटी हो जिनकी समाज में प्रतिष्ठा है। छोटे लोग चूचक की बेटी के बारे में चर्चा करें यह शर्म की बात है। तुम बाप की इज्जत का खयाल रखते हुए गांव घर की महिलाओं के साथ उठो बैठो। उनके साथ चरखा कातो और चेनाब के खूबसूरत गीत गाओ। ऐसा व्यवहार करो जिससे मां बाप की आन को ठेस न लगे। दुनिया जाट का लोहा मानती है, तुम इस जाति को बदनाम मत करो। कुछ ही दिनों में खेरा बिरादरी के लोग बारात लेकर आएंगे और तुम्हें दुल्हन बनकर पति के घर जाना होगा। तुम्हारी शादी की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। ‘

हीर ने पिता को जवाब दिया। ‘जैसे शराबी शराब नहीं छोड़ सकता। जैसे अफीमची अफीम के बिना नहीं रह सकता उसी तरह मैं रांझा के बगैर जी नहीं सकती। जैसे आम का दाग कपड़ों से छुड़ाया नहीं जा सकता उसी तरह एक बार दिल पर दाग लग जाए तो उसे धोना नामुमकिन हो जाता है।’

बेटी की बात सुन चूचक उसका गुस्सा हीर की मां मिल्की पर निकालने लगा। ‘तुमने अपनी बेटी को लार दुलार से बिगाड़ दिया है। अब यह किसी की नहीं सुनती। इसका पेट चीर दो, आंखें फोड़ दो और इसका सिर कुचल दो।’

इस पर काजी बोला, ‘जो अपने मां बाप का कहा नहीं मानते उसे जिंदा जला दिया जाएगा। यह लड़की अपनी मौत को दावत दे रही है। हीर तुमको प्यार के अंजाम के बारे में जान लेना चाहिए।सोहनी को नदी को डुबो दिया गया। सस्सी रेगिस्तान में तड़पती हुई मर गई। जब बाप को गुस्सा आता है तो वह अपनी बेटी के टुकड़े कर देता है। उसके हाथ पैर बांधकर गड्ढ़े में जिंदा गाड़ देता है। अगर हम सब तुम्हारे खिलाफ हो जाएं तो एक पल में तुम मौत के घाट उतार दी जाओगी। और जान लो, शैतान को मारने का बदला भगवान भी नहीं लेता।’

हीर काजी पर टूट पड़ी। ‘शर्म आती है उस कौम पर जो अपनी बेटियों को मारने की बात करे। ऐसी कौम का जल्दी ही धरती से नामोनिशान मिट जाएगा। बेटियों के खून के छींटे इस बात की गवाही देंगे। कयामत के दिन उनको पापी ठहराया जाएगा जो अपनी बेटियों को कत्ल करते हैं। मैं अपने मां बाप की हर बात मानने को तैयार हूं लेकिन रांझे को छोड़ने की बात मुझे स्वीकार नहीं। मैंने उससे वफा का वादा किया है। मां, अगर तुम बेटी की खुशी चाहती हो तो रांझे से मेरा ब्याह करा दो।’

मिल्की ने कहा। ‘बेटी, तुम्हारे गलत रास्ते की वजह से हमें समाज के लोग ताना देते हैं। वे कहते हैं कि तुम्हारी बेटी मुंह काला करवा रही है। तुम रांझा के बारे में हमेशा सोचती रहती हो। अपने मां बाप का सीना कड़वी बातों से छलनी करती हो।’

वहां हीर का भाई सुल्तान आ पहुंचा। वह भी मां से बहन की शिकायत करने लगा। ‘मां, हीर की वजह से हम बदनाम हो गए। ऐसी बदचलन बेटी को मत रखो। इसे जहर दे दो और छुटकारा पाओ। अगर यह तुम्हारा बात नहीं मानती और पर्दा नहीं करती तो मैं इसे मार डालूंगा। रांझे को घर की चारदीवारी के अंदर मत आने दो नहीं तो मैं उसके टुकड़े कर दूंगा। मां, अगर तुम बेटी को सही रास्ते पर नहीं ला पाई तो मैं घर को जलाकर राख कर दूंगा।’

हीर ने भाई को लताड़ा। ‘भाई, जब आंखें चार होती हैं तो प्यार को परवान चढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। मेरी किस्मत लिखी जा चुकी है। मेरे भाई, प्यार के लिए हजारों बहनें कुरबान हो सकती हैं।’

लेकिन काजी फिर भी हीर को मनाने की कोशिश करता रहा। लेकिन हीर ने काजी से कहा, ‘प्रेमी अपने सर से प्रेम का बोझ नहीं उतार सकते। सुनो काजी, मुझे भले ही लोहे की जंजीरों से जकड़ दो, मैं खेरा से शादी करने को तैयार नहीं हूं। मैं जब तक रांझे के प्यार में हूं दुनिया की बदनामी से भी मुझे खुशी ही मिलती है। मैं जन्नत में भी रांझे की हीर ही कहलाऊंगी। ‘

अब काजी भी गुस्से में आया। बोला, ‘इस दुष्ट लड़की को अब कोई नहीं रोक सकता। इसके घमंड की कोई सीमा नहीं रही। इसकी जल्दी से जल्दी शादी कर दो।’

इसके बाद हीर ने एक संदेश के साथ सहेली मीठी को रांझा के पास भेजा, ‘मेरे मां बाप भाई और काजी मुझ पर शादी का दबाव डाल रहे हैं। मेरी जिंदगी मुझसे छीनी जा रही है। रांझे तुम खुशी से जी रहे हो और मैं इधर दुख से मरी जा रही हूं।’ सहेली ने रांझे को संदेश देकर हीर को अपमानित किए जाने की बात बताई और उसे सहारा देने को कहा। कहानी आगे पढ़ें।

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