हीर रांझा 24 – काजी ने जबरदस्ती कराया सैदा से ब्याह

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रंगपुर में खेराओं ने ब्राह्मणों को ब्याह का मुहूर्त निकालने को कहा। ब्राह्मणों ने सावन महीने के एक गुरुवार को शादी की तारीख तय कर दी। चूचक के घर भी हीर की शादी की तैयारियां जोर शोर से चल रही थीं। बेटी की शादी और दहेज में कोई कमी न रह जाए इसके लिए चूचक दौलत पानी की तरह लुटा रहा था।

गुरुवार को रंगपुर से खेराओं की बारात चली। दूल्हे का नाम सैदा था। सियाल में बारातियों का जुलूस देखने के लिए लोग उमड़ पड़े। खेरा पैसा फेंक रहे थे। बारातियों को मेहमानघर में ठहराया गया और उनका स्वागत सत्कार किया जाने लगा। उधर हीर को लेने आई बारात और शादी के जश्न को देखकर रांझा का दिल दुख से भर आया था।

रांझा मन ही मन कह रहा था, ‘सैदा तो आज बिन पिए ही नशे में लग रहा है, वह नवाब बन गया और हीर उसकी रानी। चरवाहे रांझा को कौन पूछता है? हीर के बिना इस जिंदगी के लिए मौत बेहतर है।’ कुछ लोगों को रांझा से हमदर्दी भी हो रही थी। वे हीर के पिता चूचक को कोस रहे थे।

बारात हीर के दरवाजे पर पहुंची। जमकर आतिशबाजियां हो रही थीं। दूल्हा और दुल्हन को निकाह के लिए लाया गया। लड़कियां दूल्हे को छेड़ने लगीं। काजी दो गवाहों के साथ आया और निकाह पढ़वाने बैठा। लेकिन हीर ने निकाह पढ़ने से इंकार कर दिया। बोली, ‘क्यों मेरा दिमाग खराब कर रहे हो। मैं रांझा को छोड़ नहीं सकती। तुम्हारे जैसा काजी क्या जाने इश्क और सच्चा मजहब क्या होता है। काजी, तुमको खुदा नरक के कुएं में फेकेगा।’

हीर की बात सुनकर काजी डांट डपट पर उतर आया। ‘तुम मजहब मुझे सिखा रही हो। अगर जिंदा रहना चाहती हो तो जैसा मैं कह रहा हूं वैसा करो।’ हीर ने जवाब दिया, ‘मैं खुदा के दरबार में रो रोकर कहूंगी कि मेरी मां ने मुझे धोखा दिया, रांझा से जुदा कर दिया।’ इस पर काजी बोला, ‘घमंडी लड़की, मां बाप को कोस रही हो। मजहब में सब लिखा है कि मां बाप की मर्जी से ही निकाह करवाया जाता है।’

हीर बोली, ‘मेरे दिल में रांझा बसता है, इस पर सैदा का अधिकार नहीं हो सकता। मैं अगर रांझा को भुला दूंगी तो खुदा को क्या जवाब दूंगी।’ इस पर काजी हीर पर और दवाब डालने की कोशिश करने लगा। ‘तुम्हारा और रांझा का निकाह किसने करवाया। कौन गवाह है? बिना गवाह के कोई शादी वैध नहीं हो सकती। मजहब में साफ साफ लिखा है कि निकाह कैसे होता है?’

अब हीर ने काजी से सवाल पूछा, ‘किसने तुमको यह नियम कानून पढ़ाया है। तुमको कुछ भी आता जाता नहीं है। खुदा ने रांझा से मेरी शादी कराई है। सितारे और फरिश्ते उसके गवाह रहे हैं।’ काजी पूरी कोशिश करता रहा कि हीर सैदा से निकाह को मान जाए लेकिन वह नहीं मानी और लगातार यही कहती रही कि वह रांझा के सिवा किसी और को अपना पति नहीं मान सकती।

चूचक ने काजी से कहा, ‘सुनो काजी, दरवाजे पर बारात है और अगर यह शादी नहीं हुई तो सियालों के मुंह पर कालिख पुत जाएगी। मेरे रिश्तेदार लगातार पूछ रहे हैं कि शादी में देर क्यों हो रही है। मैं तुम्हारे सिवा किसी और पर भरोसा नहीं कर सकता। किसी तरह यह शादी करा दो, इसके बदले तुम जो मांगोगे वह दूंगा।’

काजी ने दुष्टता से कहा, ‘बिना धोखा के कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। बुलाओ सबको। मैं यह शादी करा के दम लूंगा। अगर रांझा बीच में आया तो उसे जलाकर मार दिया जाएगा।’ काजी को खुदा का डर ना रहा। धोखे से उसने शादी संपन्न करा दिया। हीर ने काजी से कहा, ‘खुदा तुमको इस पाप की सजा देगा झूठे, मक्कार। खुदा उन सभी काजियों पर कहर बरपाएगा जो घूस लेकर ऐसी नीच हरकत करते हैं।’

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