हीर रांझा – 33 – राज दरबार में पहुंचा सच्चे प्रमियों का मामला

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जोगी रांझा को राजा ने राज दरबार में बुलाया। रांझा के बदन पर मुक्कों और चाबुकों के निशान थे। वह दर्द से कराह रहा था। उसने राजा से कहा, ‘आपका सिंहासन हमेशा सलामत रहे महाराज। आपके इंसाफ की चर्चा दूर दूर तक है। मैं भी इंसाफ की उम्मीद लेकर आया हूं। आपके राज्य में मुझ बेगुनाह को बुरी तरह पीटा गया।’

राजा ने रांझा की बात सुनने के बाद सैनिकों को खेराओं को लाने भेजा। सैनिक खेराओं को पकड़ कर दरबार में लाए। रांझा बोला, ‘इन डकैतों ने मुझे मारा और मेरी बीवी का अपहरण कर लिया।’

खेरा कहने लगे, ‘महाराज, यह फकीर नहीं ठग है। इसने चालाकी से हमारी बहू को घर से भगाया। आप इसके फकीरी वेश पर मत जाइए। यह सांप का जहर उतारने के बहाने से आया और हीर को चुरा ले गया। इस चोर को मौत की सज़ा मिलनी चाहिए।’

रांझा ने जवाब दिया, ‘हीर मेरी है और मैं हीर का हूं। हम दोनों की शादी पांच पीरों ने कराई है। काजी ने धोखे से हीर की शादी सैदा से करा दी। इंसाफ कीजिए महाराज।’

खेराओं से राजा भी नाराज हुए। वह कहने लगे, ‘तुम लोगों ने पाप किया है। अब काजी तुम दोनों के मामले की सुनवाई करेंगे। जो झूठा निकलेगा, उसे फांसी पर लटका दूंगा।’

राजा ने इंसाफ के लिए अपने काजी को बुलाया। काजी ने दोनों पक्षों को अपना मामला रखने को कहा। खेराओं ने अपना पक्ष रखा, ‘झांग सियाल के चूचक ने अपनी बेटी हीर की शादी रंगपुर खेरा के सैदा से की। बकायदा बारात लेकर खेरा गए और मुल्ला ने गवाहों के सामने दोनों का निकाह कराया। हीर ससुराल आई लेकिन यह जोगी रावण बनकर आया और सीता को उठा ले गया। यह पहले चूचक के यहां चरवाहे का काम करता था। यह हीर से शादी करना चाहता था लेकिन चूचक नहीं माना। अब यह झूठ बोल रहा है कि इसकी हीर से शादी हुई। यह बहुत बड़ा झूठा और जालसाज है।’

अब काजी ने रांझा से पूछा, ‘फकीर, क्या तुम्हारे पास कोई गवाह है जो यह कहे कि तुम्हारी शादी हीर से हुई है।’

रांझा ने जवाब दिया, ‘आप मजहब और खुदाई जानते हैं। मेरी और हीर की रूह ने एक दूसरे के लिए हां कहा और हम दोनों एक दूजे के हो गए। खुदा ने हम दोनों की रूहों को मिलाया है। जब हमने खुदाई इश्क किया है तो उसके आगे संसार के ये रीति रिवाज क्या मायने रखते हैं?’

काजी रांझा की बातों से सहमत नहीं हुआ। उसने कहा, ‘तो तुम झूठ बोल रहे हो कि हीर और तुम्हारी शादी हुई। बेकार की बातें मत बनाओ, सच सच बताओ। तुम्हारी वजह से सियाल और खेरा बदनाम हुए हैं। यह शैतानी छोड़ो वरना सज़ा के तौर पर और चाबुक की मार पड़ेगी।’

रांझा ने कहा, ‘तुम काजियों ने दुनिया का सत्यानाश किया है। तुम लोगों को गलत बातें सिखाते हो और दूसरों के पैसे पर पेट पालते हो। अगर खेराओं से इतनी ही हमदर्दी है तो हीर के बदले अपनी बेटी दे दो उनको।’

काजी ने हीर की बांह पकड़ी और उसे खेराओं के हवाले करते हुए कहा, ‘यह फकीर मक्कार है।’ लेकिन हीर दो पाटों के बीच फंसी कुछ समझ नहीं पा रही थी कि वह क्या करे। वह मुरझाई हुई सी पीली पड़ गई थी और बेजान सी दिख रही थी।

रांझा गुस्से में बोला, ‘काजी मेरी नजरों से दूर हट जाओ। इश्क में जुदाई से बेहतर तो मेरे लिए मौत है। इन डकैतों ने मेरी हीर को लूट लिया। मैं गरीब फकीर हूं और मेरा पास तुमको देने के लिए घूस नहीं है। तुम लोग पैसे लेकर बेगुनाह को फंसाते हो और फैसला सुनाते हो।’

काजी के फैसले के बाद हीर दर्द से कराह उठी। कहने लगी, ‘ऐ खुदा, या तो मुझे रांझा से मिला दे या मौत दे दे। इस मुल्क के लोगों ने हम पर कहर बरपाया है। ऐ खुदा, ऐसे मुल्क में आग लगे, कयामत आए।’ हीर का इतना कहना था कि शहर में सच में आग लग गई। घर जलने लगे। आग लगने की खबर राज दरबार में पहुंची तो राजा समझ गए कि जरूर दो सच्चे प्रेमियों के साथ नाइंसाफी हुई है और दोनों को लोगों ने दबाया है।

राजा ने आग का कारण जानने के लिए ज्योतिषियों को बुलाया। ज्योतिषियों ने कहा कि दोनों प्रेमियों की आह को खुदा ने सुना और यह कयामत ला दिया। अब इन दोनों प्रेमियों को मिलाने पर ही खुदा हमें माफ करेंगे और यह आग भी तभी बुझेगी।

राजा ने हीर को रांझा के हाथ सौंप दिया और खेराओं को बहुत फटकारा। राजा ने कहा, ‘दो सच्चे प्रेमी पति पत्नी बनें, यही सही है।’ रांझा ने राजा से कहा, ‘आपका राज हमेशा सलामत रहे महाराज। आप पर कभी कोई संकट न आए। यही दुआ है मेरी।’ इस तरह राजा ने दो प्रेमियों को मिलाया। हीर और रांझा अब एक हो गए थे। दोनों राजा को दुआ देते हुए वहां से घर की ओर चले।

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2 thoughts on “हीर रांझा – 33 – राज दरबार में पहुंचा सच्चे प्रमियों का मामला”

  1. This story is very very funtastic & heart touching. It gives a tru message that true love never fail & god also help. To read it, I inspired.

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