100 हिंदी शायरी

हिंदी शायरी 1-10

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एक दिन दिल तोड़ता है वो शख्स मुस्कुराकर

सुन ले जरा क्या कह रही तुमसे मेरी निगाह

भूला हुआ कोई जख्म नस में तड़प उठे

तेरी यादों के सिवा बचा क्या दिल में, कुछ भी नहीं

अपनी ये दर्द भरी दास्तां सुनाता भी नहीं

इश्क तन्हा ही रहता है बेजुबां बनकर

वो दूर तलक मेरी निगाहों में बसा है

मैं तेरे वास्ते दुनिया के रंजो-गम उठा लूंगी

बेरहम याद भी मेरी रातों का सहारा ही बना

मेरा आगोश तेरे साये से लिपट जाता है

हिंदी शायरी 11-20

शराबे-इश्क को पीकर बहक रहा था कोई

दर्द टूटा है बड़ी जोर से आहें भरके

मेरा इश्क तो सरेआम है और दिल बड़ा बदनाम है

इतने तन्हा हो चुके हैं इस दुनिया में

जलते हुए खिजां में ये सावन कहां से आया

क्या मिला है मुझे इस दिल के आईने के सिवा

इन चांद-सितारों में समा के मैं रह गया

बदनसीब के इश्क में तुझे डूबकर भी क्या मिला

दे रहा हूं मैं ये इश्क की इम्तहां अपनी

आज इतना ही दर्द है कि मैं रो न सकूं

हिंदी शायरी 21-30

दीवानगी ऐसी है कि दिन-रात की खबर नहीं

ये रात जा चुकी है, कहां आप रह गए हैं

रात भर रोया फलक आशिक के संग जागकर

तेरे दिल में छुपा क्या है, खुदा जाने या तू जाने

जो रह गए थे दरम्यां वो फासले क्या थे

 तेरे जैसा कोई भी गजल हो न सका

उस हुस्न पे जांनिसार हों हर जनम में हम

दर्द बेजुबां हो तो दिल क्या कहे

अब दिल के लिए कोई पत्थर भी तो आए

जख्मों ने मेहरबानी की, आंसू ने की वफा

हिंदी शायरी 31-40

चिरागों को बुझाकर तुम भी रोती तो होगी

वो दिलबर तो बेखबर है तेरे दर्द से दोस्त

तेरे चेहरे की उदासी ने हमें बर्बाद किया

ये दर्द तेरा मेरी जान न ले जाए

दिल जब भी तन्हाई में तेरा नाम ले

कसम देकर मेरी राह भूल जाओगी तुम

ऐ हुस्न एक शम्मा जला दे जरा

तू सिखा दे मुझे, कैसे तुझे हम भूल जाएं

तुम तो हर दर्द से वाकिफ हो दुनिया में

तेरे दिल में भी आंसुओं के परिंदे होंगे

हिंदी शायरी 41-50

तू न आई तो तेरी याद में मर जाएंगे

इतने नादान हो फिर भी दिल लगाते हो

ऐ हुस्न तेरे दर्द में क्या-क्या न किए

दिल से तेरी ही यादों की महक आई

होठों पे तराने हैं और आंखों में आंसू

कागज पे लिखी बातें भी दिल तोड़ देती हैं

जल रही है तेरी चाहत जिस सीने में

ये तेरा गम है जो हमको मरने नहीं देता

मेरे हमराह तेरी राह के हम मुसाफिर हैं

इस रात के आलम में मेरा इश्क जानेजां

हिंदी शायरी 51-60

है इश्क एक गुनाह तो ये गुनाह कर लिया

दिल सुनता है तेरा नाम

क्या इश्क मिटा पाएगी तेरी जुदाई

तेरे खातिर हम अपना ये दिल जला बैठे

हुस्न है जैसे एक कयामत

मुहब्बत के समंदर में दिलदार बहुत हैं

इश्क में दिल मेरे ये तो होना ही था

फूल बनकर तू खिलेगी जिस गुलशन में

खूबसूरत हैं आप और नजर आपकी

समंदर तेरी सूरत महबूब से मिलती है

हिंदी शायरी 61-70

जिनके दर्द पे हम दिल से कुरबान हो गए

तुझे याद कर मुस्कुराने लगे हैं

अब गिन रहा हूं मैं दर्दे दिल लिए हुए

उसे फिर से पा लिया जिसे खो चुका था मैं

तुम जबसे दामन हमसे बचाने लगे

हैं दुनिया में कम ऐसे तेरे दीवाने

रातों में दर्द का बस ये कसूर होता है

रुखसत न हुआ गम तो दिल रूला बैठे

मुझको हर जख्म दिया है मेरे ही दिल ने

मेरी उल्फत को बेवफाई का ही नाम दे दो

हिंदी शायरी 71-80

कौन समझाएगा इश्क में रोनेवालों को

सौगात दी गम की चंद बरस के प्यार में उसने

तुमने दर्द ही दिया, हमने दर्द ही लिया

तू गुलाब सी महकी जिस्मो जां में

तेरे जीने की दुआ मांगती रहती हूं मैं

तुमसे बिछड़ कर चैन पाया न कभी

अपने ख्वाबों में जिस दिन देखा तुमको

तुझे करते हैं याद, दिन हो या रात

तुम्हारा सामने आना मुझे बेचैन करता है

दर्द से अब निजात दिलाए कोई

हिंदी शायरी 81-100

हम तो आवारा हुए हैं बस तेरे लिए

मुहब्बत की दुआ तुम तक पहुंच जाती तो अच्छा था

कांटों ने ही अब तक हमको जीना है सिखाया

फिर तेरी बेवफाई से दिल में दर्द उठे

रोज मिलते हैं जो उनको ये खबर ही नहीं

जो फूल उसकी जुल्फों तक नहीं पहुंच सका

प्यासी निगाहों का कोई ऐतबार नहीं

हो इश्क का तमाशा और हुस्न की कयामत

कब तू मुझे समझेगी, बस यही सोचता हूं मैं

जिस रहगुजर पे चले दूर तक तेरी तलाश में

मुहब्बत में जलती हुई एक शाम देखता हूं

जिसने न जाना किसी से कभी वफा करना

मत कहिए जमाने से कि लगा है दिल का रोग

इश्क की लहरों के भंवर में एक दिन डूब है जाना

दर्द की लहरों से जब भीगती है ये आंखें

जो पल गुजारे हमने तेरी याद में

तुमको मालूम था कि मैं भी हूं इस दुनिया में

तुम जाने कहां खो गए हो अजनबी

जबसे तू दिल के अंदर है

ये जिंदगी है आहों की गजल

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