शायरी – अपने आशिक को इतनी तो वफा देना

दिल्लगी हो तेरा इश्क तो बता देना

अपने आशिक को इतनी तो वफा देना

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One thought on “शायरी – अपने आशिक को इतनी तो वफा देना”

  1. दोस्ती वो नहीं होती जो “जान” देती है,
    दोस्ती वो नहीं होती जो “मुस्कान” देती है.
    असली दोस्ती तो वो होती है
    जो पानी में गिरा “आंसू” भी पहचान लेती है. मुस्कुराना ही खुशी नही होती,
    उमर बिताना ही ज़िंदगी नही होती,
    खुद से भी ज़्यादा ख्याल रखना पड़ता है दोस्तों का.
    क्यूँ क़ि…
    दोस्त कहना ही दोस्ती नही होती.

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