शायरी – जिंदगी भर मैं उनके लिए तमाशा ही रहा

new prev new shayari pic

कुछ बेकदरों का जमघट था शहर में
उम्रभर मैं उनके लिए तमाशा ही रहा

मेरे गमों पर करता रहा वो छींटाकशी
हर कोई मेरे दर्द को ठुकराता ही रहा

मैं बहुत परेशां हुआ खुद को बनाने में
जब देखो जमाना मुझे मिटाता ही रहा

अपने वजूद की सच्चाई पाने के लिए
मैं जिंदगी को भीड़ से हटाता ही रहा

 

©rajeev singh shayari

Advertisements

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.