4 लाइन शायरी 4 line shayari

शायरी – अचानक तुम आ गई मेरी खुशियों की राह में

दर्द के फूलों को तेरे कदमों पे निसार चुका मैं तेरी इबादत की खातिर गुलशन उजाड़ चुका मैं अचानक तुम आ गई मेरी खुशियों की राह में उदासी को फिर अपनी सूरत पे संवार चुका मैं

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दर्द के फूलों को तेरे कदमों पे निसार चुका मैं
तेरी इबादत की खातिर गुलशन उजाड़ चुका मैं

अचानक तुम आ गई मेरी खुशियों की राह में
उदासी को फिर अपनी सूरत पे संवार चुका मैं

तेरी मोहब्बत का आखिरी कतरा जब सूख गया
अपनी आंखों में एक समंदर को उतार चुका मैं

आशिकी में न जाने कहां से ये फितरत आ गई
जहां में हर शख्स से रिश्ते को बिगाड़ चुका मैं

©राजीव सिंह शायरी

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