शायरी – ये कैसा प्यार है जो तोड़कर खुश होता है

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तूने उसी नाजुक बेजुबां को तोड़ लिया
जिस गुलाब से कभी जरा भी प्यार किया

किसी से अपने दिल को जोड़ने के लिए
टूटा गुलाब देकर प्यार का इकरार किया

ये कैसा प्यार है जो तोड़कर खुश होता है
दुनिया में तूने क्यों ऐसा कारोबार किया

मुरझा गया जब तेरे किसी काम का न रहा
फेक देने का सितम तूने कितनी बार किया

©राजीव सिंह शायरी

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One thought on “शायरी – ये कैसा प्यार है जो तोड़कर खुश होता है”

  1. मोहबबत ओई ही करता जो जान की बाजी करता है। अपनो चाहे भूखा मरे या पेयसा मरे अपने जान को राजी करता है।

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