2 लाइन शायरी

शायरी – ये सफ़र शुरू हुआ था मेरे रोने के साथ

ये सफर शुरू हुआ था मेरे रोने के साथ मरते वक्त याद न आया कि हंसे कब थे जिंदगी गुजर गई उदासियों के जाल में पता न चला कि इस जाल में फंसे कब थे

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ये सफर शुरू हुआ था मेरे रोने के साथ
मरते वक्त याद न आया कि हंसे कब थे

जिंदगी गुजर गई उदासियों के जाल में
पता न चला कि इस जाल में फंसे कब थे

तेरी खुशी के लिए समझौता किया वरना
अपनी मजबूरियों के आगे झुके कब थे

देखा तो आखिर में मेरे पास कुछ न मिला
कैसे बताएं कि अपनों से हम लुटे कब थे

 

©rajeev singh shayari

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