4 लाइन शायरी 4 line shayari

शायरी – रोने की अब कितनी ख्वाहिश है बाकी

जिंदगी में दर्दो गम की कितनी बारिश है बाकी तेरी याद में रोने की कितनी ख्वाहिश है बाकी जिंदा रहने के लिए मैं शहर दर शहर भटका तुम मिलो तो ठहर जाऊं, इतनी गुजारिश है बाकी

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जिंदगी में दर्दो गम की कितनी बारिश है बाकी
तेरी याद में रोने की कितनी ख्वाहिश है बाकी

जिंदा रहने के लिए मैं शहर दर शहर भटका
तुम मिलो तो ठहर जाऊं, इतनी गुजारिश है बाकी

दुनियादारी में कोई दिल की बात नहीं करता
अक्ल के इन रिश्तों में रह गई साजिश है बाकी

हर कोई जान गया पर तुम तक बात नहीं पहुंची
इश्क मुकम्मल करने को तेरी सिफारिश है बाकी

©rajeevsingh     शायरी

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