शायरी – अपने वज़ूद की तलाश में हूँ तबसे

अपने वज़ूद की तलाश में हूँ तबसे

जबसे देखा है तेरा दर्द करीब से

जैसे अपना ही साया था सामने

तू मिली थी यूँ बदनसीब से

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