4 लाइन शायरी 4 line shayari

शायरी – अहसान तेरा अपने सर पे उठाए फिरते हैं

उल्फ़त के जख़्मों को दिल में दबाए फिरते हैं

अहसान तेरा अपने सर पे उठाए फिरते हैं

इतने पत्थर न थे कि हम चोट सह जाते

एक मसले फूल को सीने में छुपाए फिरते हैं

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