शायरी – जमाने भर का गम भुला दे जरा

बांध ली क्यूं तुमने जुल्फें अपनी

अपने शाने पे इसे बिखरा ले जरा

जमाने भर का गम भुला दे जरा

ऐ गजल पहलू में सुला ले जरा

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