शायरी – जिंदगी की दो निगाहें थम ही जाएंगी

मौसमों की ये बरसात थमे, ना थमे

जिंदगी की दो निगाहें थम ही जाएंगी

मेरे आंसू से दरिया बने, ना बने

मगर बरसात की दास्तां बन ही जाएंगी

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