शायरी – जी लेता हूं खामोशियों के तराने में

मुझे अपनी तन्हाई मिटाने की आदत नहीं

इसलिए रहता हूं दूर कहीं वीराने में

जहां न कोई शोर है, न कोई होड़ है

जी लेता हूं खामोशियों के तराने में

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