शायरी – तेरी आरजू ही जब दुआ बन गई

तेरी याद ही जब जिंदगी बन गई

तो भूलने को बाकी क्या रह गया

तेरी आरजू ही जब दुआ बन गई

तो माँगने को बाकी क्या रह गया

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