शायरी – तेरे दर्द में वो मस्ती नहीं रही

थका-थका सा अब रहता हूँ यूँ

कि तेरे दर्द में वो मस्ती नहीं रही

लड़खड़ाती जली दिल में चाँदनी

अब अहसास में वो गर्मी नहीं रही

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