शायरी – हरेक दामन में होते नहीं इतनी खुशियां

हरेक दामन में होते नहीं इतनी खुशियां

कि गम किसी रास्ते से आ न सके

फूल होठों के खिलते हैं कई बार लेकिन

ऐसा भी नहीं वो मुरझा न सके

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