शायरी – मुझे गले से लगाकर वो नगमा सुनाओ

तुम प्यार का चिराग आंचल में छुपाके लाओ

मेरे पहलू में आकर आशियां रोशन बनाओ

कभी प्यास होठों पे गीत बनके जो आए

मुझे गले से लगाकर वो नगमा सुनाओ

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