शायरी – ये तनहाइयाँ जो तेरी गुलाम हैं

ये तनहाइयाँ जो तेरी गुलाम हैं

रहती हैं हर पल तेरी खिदमत में

दिल ही दिल में पूजता हूँ तुमको

लेकिन तेरी तस्वीर भी नहीं किस्मत में

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