शायरी – हमें तेरी हर बेरूखी से इश्क है

न बाजुओं में हमको भरा तो क्या

न अपने सीने से लगाया तो क्या

हमें तेरी हर बेरूखी से इश्क है

न अपने दिल में बसाया तो क्या

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