शायरी – आज फिर इस दिल में आग लगी

आज फिर इस दिल में आग लगी
आज फिर सहरा में बरसात हुई
शब के हर कोने में अंधेरा है
खाक ही अब तलक है हाथ लगी

(सहरा- रेगिस्तान, शब- रात)

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