रिश्ता शायरी

शायरी – खून के रिश्तों में ही होती है अक्सर दुश्मनी

धूमधाम से करके शादी करते हैं बच्चे पैदा औलादों-मां-बाप के झगड़ों में रोता है ये जहां

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बन रहे हैं रोज शहर में ईंट-पत्थर के मकां
जिसमें दबते हैं कई जुल्मो सितम के निशां

खून के रिश्तों में ही होती है अक्सर दुश्मनी
हक-हिस्सों के झगड़े में खून करते हैं इसां

सबके दिल में एक जज्बा, हाय दौलत हाय पैसा
क्या मर्द और क्या औरत, एक से हैं सब यहां

धूमधाम से करके शादी करते हैं बच्चे पैदा
औलादों-मां-बाप के झगड़ों में रोता है ये जहां

©RajeevSingh

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