शायरी – एक गुमराह तेरा शहर खोजने निकला

एक गुमराह तेरा शहर खोजने निकला

अपनी मंजिल का रहगुजर खोजने निकला

तुम बड़े दूर थे लेकिन तेरा अहसास तो था

तेरे जैसा ही हमसफर खोजने निकला

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