शायरी – एक पल मिलने की ख्वाहिश थी

माँगा था एक लम्हां खुशी का

सदियों का गम तुम दे गए

एक पल मिलने की ख्वाहिश थी

जन्मों का इंतजार तुम दे गए

 

कुछ कतरे आँसू के नहीं

दामन को दरिया दे गए

एक टुकड़ा सुकूं का जो दोगे

समझूँगा कुछ तो दे गए

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