दर्दे दिल शायरी

शायरी – कांटों, फूलों, खताओं और गुनाहों में

जुल्मो सितम की इंतहा हमने देखी है तुझे जी भरके अभी देखना बाकी है

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अभी तुमको आधा समझना बाकी है
तुमको जाना है लेकिन परखना बाकी है

जुल्मो सितम की इंतहा हमने देखी है
तुझे जी भरके अभी देखना बाकी है

कांटों, फूलों, खताओं और गुनाहों में
तेरे अक्स को निरखना बाकी है

जिंदगी ने मुझको बहुत रुलाया है
तुझे भी पल भर को हंसाना बाकी है

©RajeevSingh

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