शायरी – बेवफाओं की भीड़ आज साथ चली है

बेवफाओं की भीड़ आज साथ चली है

माशूक के मैयत की बारात चली है

रस्मो-रिवाज में हुस्न कैद रह गई

सूली पे चढ़के ही वो आजाद हुई है

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