राजीव सिंह

शायरी – अश्क में डूबी नज़र है, दर्द है खूने जिगर

मेरी जिंदगी को एक बार नागिन ने जो डस लिया अब असर करता नहीं दुनिया का कोई जहर

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इश्क की बाजी में हारे जाने कितने बाजीगर
इस तिजारत में बिके जाने कितने सौदागर

सिर्फ इतनी सी खला है मौत भी मुमकिन नहीं
अश्क में डूबी नज़र है और दर्द है खूने जिगर

फासला ही एक हकीकत और यही अंजाम है
फुरकतों की वादियों में है आशिकों का शहर

जिंदगी को एक बार नागिन ने जो डस लिया
अब असर करता नहीं दुनिया का कोई जहर

तिजारत – व्यापार
फुरकत – जुदाई

©RajeevSingh

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