शायरी – जिस सादगी में नूर हो, वो हुस्न ही मेहताब है

जो गुमां करे इस नक्श पे, वो अक्स भी एक खाक है

जिस सादगी में नूर हो, वो हुस्न ही मेहताब है

 

जिस नजर में खुमार हो,जो जिगर से जांनिसार हो

जिसे जलके ही करार हो, वो इश्क ही आफताब है

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