आशिक शायरी

शायरी – दिल की ये आहें तेरे नाम कर दी

तुमसे बिछड़ के खफ़ा दिल है फिर भी तुझे भूल जाऊं, वो हसरत नहीं है

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तेरी जुस्तजू में ये हालत हुई है
खयालों में जीने की आदत हुई है

हमें चांद पाने की ख्वाहिश नहीं है
फकत एक जुगनू की चाहत रही है

दिल की ये आहें तेरे नाम कर दी
तेरे गम में आंखों से दरिया बही है

तुमसे बिछड़ के खफा दिल है फिर भी
तुझे भूल जाऊं, वो हसरत नहीं है

©RajeevSingh

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