शायरी – हम रो रहे हैं दो किनारों की तरह

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दर्द उठ रहा है सागर में लहरों की तरह
दिल रो रहा है टूटे हुए किनारों की तरह

तुमपे भरोसा था, तू बेवफा हो गया
क्या खबर थी तुम भी हो हजारों की तरह

इस रोशन जहां में खुशी देखनी चाही
तेरा दर्द छा जाता है अंधेरों की तरह

जबसे तुम जुदा हुए हो ऐ मेरे दोस्त
मेरी जिंदगी बन गई है मजारों की तरह

©RajeevSingh

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