शायरी – सच्ची मुहब्बत दिल से मिटा दे, किसके बस की बात है

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टूटे दिल को अक्ल सिखा दे, किसके बस की बात है
सच्ची मुहब्बत दिल से मिटा दे, किसके बस की बात है

उम्र गुजर जाती है पल-पल उनके यादों के मंजर में
फिर किसी से दिल लगा ले, किसके बस की बात है

रोज मैखाने में जाकर रोते हैं वो जुदाई में
पीकर कोई दिल बहला ले, किसके बस की बात है

लेकर आती हैं बहारें जीवन में फूलों का मौसम
पतझड़ का भी मन महका दे, किसके बस की बात है

©RajeevSingh

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