शायरी – वो जो तन्हा सा, परेशां सा है

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वो जो तन्हा सा, परेशान सा है
इस दुनिया में दिले-नादान सा है

जाने क्या खोया उसका अपना
अजनबी खुद से ही अंजान सा है

इस जमाने की भरी महफिल में
किसी कोने में रखे सामान सा है

कोरे कागज से उदास चेहरे पे
आंसुओं से लिखा बयान सा है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

 

One thought on “शायरी – वो जो तन्हा सा, परेशां सा है”

  1. love ka to kou omar nehi
    masti ka bhi koye umar nehi
    loog jo kete hai une kehene do
    are love keya one kud hi pata nehi

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