शायरी – गम बेरहम जो तुमने दिया है, उनसे मैं कैसे दामन बचाऊं

new prev new next

गम बेरहम जो तुमने दिया है
उनसे मैं कैसे दामन बचाऊं
नज़र फेरकर जो तुम चल दिए थे
तस्वीर तेरी वो कैसे भुलाऊं

शामो-सहर की गर्दिशे-फजां में
हम तेरे बिन जीए जाते रहे
सांसों का दम तो निकलता रहा
सबा का जहर पीए जाते रहे

तुम मुझे छोड़के चली जाओ कहीं
मेरा इश्क दिल से मिटेगा नहीं
मुंतजिर रहूंगा मैं मौत तलक
ये इंतजार मुझसे छूटेगा नहीं

सबा – सुबह

©RajeevSingh

Advertisements

Leave a Reply