शायरी – तुम भले ही किसी गैर की बाहों में रहो

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मेरे आंगन में रोशनी भले ना रहे
तेरे दामन में चांदनी हमेशा रहे

मर भी जाऊं तो कफन मिले ना मिले
मेरे खातिर तेरी ओढ़नी हमेशा रहे

तुम भले ही किसी गैर की बाहों में रहो
तेरे दिल में एक जोगनी हमेशा रहे

तेरे आशिक के हर दर्द भरे नज्मों में
गमे-उल्फत की ये रागिनी हमेशा रहे

©RajeevSingh # बेस्ट शायरी

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17 thoughts on “शायरी – तुम भले ही किसी गैर की बाहों में रहो”

  1. Sujata teri yad me mai eyu tarapata rahuga thu kab tak tarapati rahegi intajar karata rahuga

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