सूफी शायरी

शायरी – ऐ हुस्न मेरे इस दिल में बस अक्स बना है तेरा

ये दर्द है जब भी थकता, मेरे आंसू रूक जाते हैं सदियों से प्यासे राही को बस रेत नजर आते हैं जाने कबसे अंखियों को है इंतजार बस तेरा ये इश्क दीवाना तेरा, ये इश्क दीवाना तेरा

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ये इश्क दीवाना तेरा, ये इश्क दीवाना तेरा
ऐ हुस्न मेरे इस दिल में बस अक्स बना है तेरा
ये इश्क दीवाना तेरा, ये इश्क दीवाना तेरा

मैं भूल गया था रस्ता, धरती पर जनम लिया जब
इस जिस्म में रूह मिली तो महसूस हुआ ये मजहब
अब तू खुदा है मेरी और दिल बंदा है तेरा
ये इश्क दीवाना तेरा, ये इश्क दीवाना तेरा

ये दर्द है जब भी थकता, मेरे आंसू रूक जाते हैं
सदियों से प्यासे राही को बस रेत नजर आते हैं
जाने कबसे अंखियों को है इंतजार बस तेरा
ये इश्क दीवाना तेरा, ये इश्क दीवाना तेरा

सारी दुनिया में न तो अपने हैं, न ही पराए
पूरा गुलशन खिलता है, बस हम ही हैं मुरझाए
तेरे बिन मौसम बंजर और झूठा है जग सारा
ये इश्क दीवाना तेरा, ये इश्क दीवाना तेरा

©RajeevSingh

 

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