आशिक शायरी

शायरी – ये मुहब्बत भी कश्मीर बनके रह गई

इस जमाने के तानों को सुनते-सुनते ये तमाशा मेरी तकदीर बनके रह गई सरहदें पारकर हम-तुम न मिल पाए कभी ये मुहब्बत भी कश्मीर बनके रह गई

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जिंदगी जख्म की तस्वीर बनके रह गई
तू मेरे दिल पे लगी तीर बनके रह गई

मैं बना फिरता हूं दीवाना तेरे गम में
तू मेरे पैरों की जंजीर बनके रह गई

इस जमाने के तानों को सुनते-सुनते
ये तमाशा मेरी तकदीर बनके रह गई

सरहदें पारकर हम-तुम न मिल पाए कभी
ये मुहब्बत भी कश्मीर बनके रह गई

©RajeevSingh

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