इश्क क्या है राजीव सिंह

शायरी – रात ढलती है तो ढलने की दुआ दो इसको

शायरी रात ढलती है तो ढलने की दुआ दो इसको सांस चलती है तो रूकने की दुआ दो इसको तेरा दुश्मन तेरा दीवाना बना बैठा है इस जमाने से उठने की दुआ दो इसको

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रात ढलती है तो ढलने की दुआ दो इसको
सांस चलती है तो रुकने की दुआ दो इसको

तेरा दुश्मन तेरा दीवाना बना बैठा है
इस जमाने से उठने की दुआ दो इसको

धार सावन की निकलती है तेरी आंखों से
मेरे दरिया में बहने की दुआ दो इसको

एक साया सा तड़पता है जो चिराग तले
आग में डूबके मरने की दुआ दो इसको

©RajeevSingh # दीवानगी शायरी

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