शायरी – निगाहों की उदासी कहती है फसाना

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सीने में दफन है वो गुजरा जमाना
खामोशी बन गयी जीने का बहाना

दर्द के बदन पे तबस्सुम की पैरहन
निगाहों की उदासी कहती है फसाना

अपने हैं मेरे दूर, मैं खुद से बहुत दूर
तन्हाई ने मुझे बना दिया है दीवाना

उस हुस्न को देखा हमें इश्क हो गया
बरसों तलक मिला रोने का बहाना

©RajeevSingh

2 thoughts on “शायरी – निगाहों की उदासी कहती है फसाना”

  1. सर जी आप की सायरी को पड़ कर बहुत अछा लगा आप हमेसा ऐसी सायरी करते रहो भगवान से मेरी यही प्राथना है।

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