गजल शायरी

शायरी – मेरी राहों पे रहबर मुझे खींचता चला गया

मेरी राहों पे रहबर मुझे खींचता चला गया मैं उसे देख न पाया और चलता चला गया इन समाजों की जंजीरों में मन घुटता था इसलिए भीड़ में मैं तन्हा होता चला गया

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मेरी राहों पे रहबर मुझे खींचता चला गया
मैं उसे देख न पाया और चलता चला गया

इन समाजों की जंजीरों में मन घुटता था
इसलिए भीड़ में मैं तन्हा होता चला गया

आपको देखकर भी पूछना तो भूल गया मैं
आपके बारे में ही दिल सोचता चला गया

मेरी दुनिया में बेखुदी थी मगर मैं न था
खबर थी कि जिंदा हूं पर मरता चला गया

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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