शायरी – यही इश्क का अंजाम था, ये जुबां भी नाकाम था

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तुझे बोलने से गुरेज था, मुझे पूछने से परहेज था
यही इश्क का अंजाम था, ये जुबां भी नाकाम था

तेरा देखकर मुंह मोड़ना, मेरा देखकर राह छोड़ना
नजर में कुछ अरमान थे, बेरुखी में भी पैगाम था

कलियां खिली थी जुल्फ में, गजल मिली तेरे नक्श में
मेरी शायरी में ऐ सनम, खुशबू तेरी, तेरा नाम था

दिल भी नहीं, जां भी नहीं, खूं भी नहीं, अश्क भी नहीं
तुझे क्या दिया मेरी मौत ने, कुछ न बचा अरमान था

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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