मुहब्बत शायरी

शायरी – राहत नहीं उस चांद को, हर आग को जो सह गया

शायरी मेरा दर्द भी बेरंग था जो आंसुओं में घुल गया था इश्क का ये खून जो मेरी नजर से बह गया इस जहान की गली-गली ईमान से वीरान थी इस पाप की नगरी में ये दिल कहीं पे मर गया

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मेरा दर्द भी बेरंग था जो आंसुओं में घुल गया
था इश्क का ये खून जो मेरी नजर से बह गया

इस जहान की गली-गली ईमान से वीरान थी
इस पाप की नगरी में ये दिल कहीं पे मर गया

सूने महल की सेज पर तन्हा सा बादशाह था
जब लुट गई रियासतें, कोई साथ भी न रह गया

मेरे दर्द के चिराग को जलने से है फुरसत कहां
राहत नहीं उस चांद को, हर आग को जो सह गया

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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