शायरी – तेरे दर्द का ये बयार था या आशिकी का खुमार था

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जो जल गया वो चिराग था, जो बुझ गया वो आग था
जो गल गया वो खाक था, जो बह गया वो आब था

तकदीर के मानिंद मैं बनता रहा, बिगड़ता रहा
बन गया तो गुलाम था, जो बिगड़ गया तो इंसान था

दुनिया की सजा काट के, अब जा रहा इसे छोड़ के
ये जिस्म ही कारागार था, ये रूह ही गुनहगार था

जलता हुआ शोला-ए-दिल लहक गया, बहक गया
तेरे दर्द का ये बयार था या आशिकी का खुमार था

(आब- पानी)

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari