गम शायरी

शायरी – इश्क छाया है जबसे मेरी निगाहों पे

इश्क छाया है जबसे मेरी निगाहों पे बस अंधेरा ही नज़र आता है जमाने में बरस चुका है सावन, बदल गया मौसम फिर भी बादल हैं आकाश के खजाने में

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इतने मसरूफ हैं हम खुद को ही मिटाने में
उम्र गुजरी है इस दिल को ही जलाने में

बेबस दर्द के आँसू बह जाए भी तो क्या
वक्त लगता नहीं छलक के सूख जाने में

इश्क छाया है जबसे मेरी निगाहों पे
बस अंधेरा ही नज़र आता है जमाने में

बरस चुका है सावन, बदल गया मौसम
फिर भी बादल हैं आकाश के खजाने में

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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