शायरी – कितनी प्यासी थी ये लहरें रेतों के लिए

love shyari next

जो सुलगता नहीं हो वो चिरागां कैसा
जो उजड़ता नहीं हो वो बहारां कैसा

मैंने पत्थर को भी शीशे का टुकड़ा समझा
बिना दिल के इन निगाहों का नजारा कैसा

जिंदगी थी तो तन्हा थे, ये भीड़ न थी
मेरी मैयत पे रिश्तों का ये सहारा कैसा

कितनी प्यासी थी ये लहरें रेतों के लिए
बिना रेतों के समंदर का गुजारा कैसा

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

Advertisements

Leave a Reply