गम शायरी

शायरी – क्या करूँ ये ही दिल की भाषा है

मेरे हर लफ्ज़ में निराशा है क्या करूँ ये ही दिल की भाषा है बेवफा होते हैं बोलने वाले हमें खामोशी का ही दिलासा है

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मेरे हर लफ्ज़ में निराशा है
क्या करूँ ये ही दिल की भाषा है

बेवफा होते हैं बोलने वाले
हमें खामोशी का ही दिलासा है

बिना दौलत के कोई रिश्ता नहीं
सरे-बाज़ार में ये खुलासा है

सारे दुश्मन से हैं एक-दूजे के
दोस्ती तो बस एक तमाशा है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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