आवारा शायरी

शायरी – जो सुन ना सकी मेरी खामोश सदा

जो सुन ना सकी मेरी खामोश सदा वो नाजनीन मेरे दिल की दरगाहों में है हम तो मुफ़लिस ही रहे मुसलसल दोजख तो आज भी सैरगाहों में है

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ना बंदिशों में है, न मकानों में है
मेरा अंजाम बस आज़ाद पनाहों में है

दिल आँसू भी बहाए तो कोई बात नहीं
हँसी तो बेवफाओं के गुनाहों में है

जो सुन ना सकी मेरी खामोश सदा
वो नाजनीन मेरे दिल की दरगाहों में है

हम तो मुफ़लिस ही रहे मुसलसल
दोजख तो आज भी सैरगाहों में है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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