तलाश शायरी

शायरी – मैं भटकती हूँ जिस्म का आईना लेकर

एक तन्हा सा बदन है टूटे जीवन में जी रही हूँ लुटे दिल की दास्ताँ लेकर तेरा चेहरा नहीं है आज मेरे शीशे में मैं भटकती हूँ जिस्म का आईना लेकर

prevnext

चल पड़ी राह में एक दर्द का नगमा लेकर
जल रही धूप में बारिश का सपना लेकर

तुम आए नहीं लेकर मेरी वो खुशियाँ
क्या करूँगी अब कोई तमन्ना लेकर

एक तन्हा सा बदन है टूटे जीवन में
जी रही हूँ लुटे दिल की दास्ताँ लेकर

तेरा चेहरा नहीं है आज मेरे शीशे में
मैं भटकती हूँ जिस्म का आईना लेकर

©राजीव सिंह शायरी

Advertisements

Leave a Reply