आशिक शायरी

शायरी – हो सकता है तेरे दिल में मेरे खातिर जगह न हो

शायरी हो सकता है तेरे दिल में मेरे खातिर जगह न हो हो सकता है इसके पीछे, किसी तरह की वजह न हो लो गुनाह कुबूल किया, फिर आशिक कहता है कि दुनिया तेरी कचहरी में मेरे इश्क पे जिरह न हो

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हो सकता है तेरे दिल में मेरे खातिर जगह न हो
हो सकता है इसके पीछे, किसी तरह की वजह न हो

लो गुनाह कुबूल किया, फिर आशिक कहता है कि
दुनिया तेरी कचहरी में मेरे इश्क पे जिरह न हो

रात में शाम का बादल ही चांद का कातिल बनता है
सोचता हूं कि तेरे बिन अब इन रातों की सुबह न हो

तू है गैर के घर में और मैं हो गया जग से पराया
इश्क की दुनिया में किसी का अंजाम मेरी तरह न हो

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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