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शायरी – आज़ाद परिंदे के पंखों का बयाँ सुन ले

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आज़ाद परिंदे के पंखों का बयाँ सुन ले
पिंजरे की हकीकत क्या, ये मेरी जुबाँ सुन ले

पिंजरे में मिलती थी हर एक खुशी लेकिन
उस चाँद को छूने की हिम्मत थी कहाँ पहले

जब चाहे जहाँ चल दे, जब चाहे जहाँ रूक जा
पिंजरे से जो बाहर हो, जब चाहे जहाँ उड़ ले

दुनिया तो सिखाएगी पंखो को कतरना ही
ना सीख तू ये दिलबर, एक राह तू खुद चुन ले

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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